जीवन
का सौन्दर्य
मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है,
ऐसा हम अपने बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं | हमने स्वयं के अनुभव से भी जाना है कि
जीवन जीना और समाज के हित में काम करते हुए दुनिया में मिसाल कायम करना आसान नहीं
है | मनुष्य जीवन की सार्थकता तभी है जब वह अपने समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए
कुछ बहुमूल्य काम कर जाएँ | हर मनुष्य बेहतरीन जीवन चाहता है | विद्यार्थी-जीवन हो
या युवावस्था या फिर वृद्धावस्था ही क्यों न हो ‘जीवन का सौन्दर्य’ ही प्राथमिक है
|
एक बार की बात है एक
विद्यार्थी ने अपने अध्यापक से पूछा – “सर, मैं अपने जीवन में बहुत उपलब्धियां
हासिल करना चाहता हूँ | मैं खूब बड़े-बड़े काम कर जाना चाहता हूँ ताकि लोग मुझे और
मेरे कामों को हमेशा याद रखें | मैं इस दुनिया को सभी के लिए बेहद खुबसूरत बना
देना चाहता हूँ ताकि सभी प्रेम और शांति से रह सकें |” अध्यापक अपने होनहार
विद्यार्थी की बात बड़े ध्यान से सुन रहे थे | उन्होंने कहा – “बेटा पहले अपने जीवन
को खुबसूरत बनाओ | अगर हम सबका जीवन खुबसूरत बन जाएगा तो यह दुनिया खुद-ब-खुद
खुबसूरत लगने लगेगी |” बच्चे ने उत्साह से पूछा – “अपने जीवन को खुबसूरत कैसे
बनाया जाए ? आप मुझे बताइए, मैं ऐसा ज़रूर करूँगा |” अध्यापक ने तीन चीजें उस विद्यार्थी को दीं - थोड़ी सी रूई, एक मोमबत्ती और एक सुई |...और कहा - “अब तुम जाओ |” वह बच्चा उन तीनों चीज़ों को
लेकर वहां से चल
पड़ा, पर उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अध्यापक ने ये चीजें उसे क्यों दीं ! वह वापस उनके पास आकर
बोला, ‘‘सर ! यह जो कुछ आपने मुझे दिया, यह मेरी समझ में नहीं
आ रहा है !’’ अध्यापक ने समझाया - ‘‘यह जो रूई मैंने तुम्हें दी है, इसकी खासियत यह है कि यह धागा बनकर हर एक की लाज ढंकती है । ईश्वर को भी वही इंसान प्यारा है जो दूसरों की लाज ढंकता है और दूसरों को संरक्षण देता है ।’’ ‘‘और यह मोमबत्ती?’’ ‘‘मोम बनकर जलती जरूर है, लेकिन प्रकाश बनकर
अंधेरा दूर करती है, भटकों को रास्ता दिखाती है। तुम भी इसी तरह के बन जाओ । सदैव दूसरों के लिए प्रकाश बनकर रहना | तुम्हें तीसरी चीज जो मैंने दी है, वह है, सुई । सुई के बिना संसार का काम नहीं चलता । यह टुकड़ों को, फटे हुओं को, कटे हुओं को जोडऩे का काम करती है। सुई के बिना कुछ भी नहीं जुड़ा करता। दुनिया में भी वही ईश्वर को प्यारा है जो फटे हुए दिलों को सिला करता है, जो टूटे हुए दिलों
को जोड़ा करता है, बिखरे हुओं को जो इकट्ठा करता है।“
बच्चा अपने अध्यापक की बात को
बड़े ध्यान से सुन रहा था | उसने उन तीनों चीज़ों को समेटा और उनको प्रणाम करके
आत्मविश्वास से अपने घर की ओर चल दिया |
आज हमारे विद्यार्थियों और
युवाओं में इन तीनो गुणों की बेहद आवश्यकता है | जिस दिन हर बालक ऐसा बन जाएगा
संसार फिर खुबसूरत हो उठेगा |
**************************************** -रश्मि