विवशता ....
किसे कहा जाए
कर्महीनता को
या
कर्म-प्रवृत्ति होने पर भी
घिर आई विषम विडंबना को ।
कर्महीनता विवशता नहीं
निष्क्रियता है ।
विवशता है
सामर्थ्यवान की कर्महीनता ।
रुदन ..नहीं विवशता
किसी के अश्रुओं से
अस्पृश्य रहना विवशता है ।
विवशता है
निकट से ताज को देखना
और स्व-अतित्व
जकड़ा हो जंजीरों में ।
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किसे कहा जाए
कर्महीनता को
या
कर्म-प्रवृत्ति होने पर भी
घिर आई विषम विडंबना को ।
कर्महीनता विवशता नहीं
निष्क्रियता है ।
विवशता है
सामर्थ्यवान की कर्महीनता ।
रुदन ..नहीं विवशता
किसी के अश्रुओं से
अस्पृश्य रहना विवशता है ।
विवशता है
निकट से ताज को देखना
और स्व-अतित्व
जकड़ा हो जंजीरों में ।
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