....काश ! बंटवारा न हुआ होता ‘एक भारतवर्ष का’ ‘दो दिलों का’ और ‘तीन रंगों का’
रात 12 बजने के साथ मेरा देश और मेरे प्यारे देशवासी आज़ादी का 69वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं| हम सभी के लिए यह दिन अत्यंत हर्ष लेकर आता है| ...लेकिन साथ में एक दर्द भी जगा देता है, बंटवारे का दर्द| कई क्षोभ मन मस्तिष्क को परेशान कर जाते हैं|
हम सभी जानते हैं कि इनका हल कुछ नहीं है, यह पेचीदगियाँ हमें आज़ादी के साथ ही भेंट में मिल गईं थीं| लेकिन फिर भी दिल हर बार यह कह ही उठता है कि ‘काश! जिन्ना की टी.बी. और फिर कैंसर की खबर पटेल ने छुपाई न होती तो कुछ और राह निकल आती’ काश! माउन्टबेटन को जिन्ना की बीमारी की सूचना समय पर मिल जाती तो वो हमारी आज़ादी को बेशक दो वर्ष और टाल देते और हमारी धरती का बंटवारा भी रुक जाता’ ‘काश! जिन्ना को अपने अंतिम दिनों में नहीं बल्कि पहले ही एहसास हो जाता कि पकिस्तान मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल थी ....काश ! बंटवारा न हुआ होता ‘एक हिंदुस्तान का’ ‘दो दिलों का’ और ‘तीन रंगों का’
बंटवारे के बाद भी – ‘काश! जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पंडित नेहरु के नहीं बल्कि सरदार पटेल के सुपुर्द किया जाता’ ‘काश! कश्मीर-मसला हैदराबाद-मसले की तरह हल कर लिया जाता, यूनाईटेड नेशन में न ले जाया जाता’ ‘काश! हमारे देश को पहले प्रधानमंत्री में रूप में सरदार पटेल जैसा नायक मिल जाता’
इन सबके बावजूद “जय हिन्द” “माँ तुझे सलाम- वन्दे मातरम्”
- रश्मि
रात 12 बजने के साथ मेरा देश और मेरे प्यारे देशवासी आज़ादी का 69वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं| हम सभी के लिए यह दिन अत्यंत हर्ष लेकर आता है| ...लेकिन साथ में एक दर्द भी जगा देता है, बंटवारे का दर्द| कई क्षोभ मन मस्तिष्क को परेशान कर जाते हैं|
हम सभी जानते हैं कि इनका हल कुछ नहीं है, यह पेचीदगियाँ हमें आज़ादी के साथ ही भेंट में मिल गईं थीं| लेकिन फिर भी दिल हर बार यह कह ही उठता है कि ‘काश! जिन्ना की टी.बी. और फिर कैंसर की खबर पटेल ने छुपाई न होती तो कुछ और राह निकल आती’ काश! माउन्टबेटन को जिन्ना की बीमारी की सूचना समय पर मिल जाती तो वो हमारी आज़ादी को बेशक दो वर्ष और टाल देते और हमारी धरती का बंटवारा भी रुक जाता’ ‘काश! जिन्ना को अपने अंतिम दिनों में नहीं बल्कि पहले ही एहसास हो जाता कि पकिस्तान मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल थी ....काश ! बंटवारा न हुआ होता ‘एक हिंदुस्तान का’ ‘दो दिलों का’ और ‘तीन रंगों का’
बंटवारे के बाद भी – ‘काश! जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पंडित नेहरु के नहीं बल्कि सरदार पटेल के सुपुर्द किया जाता’ ‘काश! कश्मीर-मसला हैदराबाद-मसले की तरह हल कर लिया जाता, यूनाईटेड नेशन में न ले जाया जाता’ ‘काश! हमारे देश को पहले प्रधानमंत्री में रूप में सरदार पटेल जैसा नायक मिल जाता’
इन सबके बावजूद “जय हिन्द” “माँ तुझे सलाम- वन्दे मातरम्”
- रश्मि