गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

हमारी चेतना

पूरे दिन में कुछ समय हमें सिर्फ अपने लिए निकालना चाहिए| उस समय कोई हमारे साथ न हो, न प्रत्यक्ष में और न ही मन में| हम सिर्फ अपने साथ हों ...सिर्फ अपने साथ ...एकदम अकेले| धीरे-धीरे हमें एक परम सत्ता का अहसास होने लगेगा ...हमें अहसास होने लगेगा कि सारी सृष्टि हममे ही समा रही है ...या...हम विस्तृत और विस्तृत होते जा रहे हैं ...इतने विस्तृत कि हमारी चेतना पूरी सृष्टि में फ़ैलती जा रही है|

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