कमाल है न बरसात
बरसात कहाँ-कहाँ बरसती है...
कभी-कभी गरीब की छत से बरसती है तो कभी-कभी अमीर की तिजोरी में बरसती है |
कभी-कभी बादलों से बरसती है तो कभी-कभी माँ की आँखों से बरस जाती है |
कभी-कभी प्यार भरी नज़रों से बरसती है तो कभी-कभी नफरत की बारूदों से बरसती है |
कभी-कभी इंसानियत की एक आह! से बरसती है तो कभी-कभी धर्म के चौराहों पर बरसती है |
कभी-कभी बुज़ुर्ग के टूटे छातों पर बरसती है तो कभी-कभी युवाओं के अरमानों पर बरसती है |
.........कमाल है न बरसात.....सैकड़ों बूंदों-सी ......अलग-अलग रूपों में बरसती है |