गुरुवार, 12 सितंबर 2013

कमाल है न बरसात

कमाल है न बरसात 

बरसात कहाँ-कहाँ बरसती है...
कभी-कभी गरीब की छत से बरसती है तो कभी-कभी अमीर की तिजोरी में बरसती है |
कभी-कभी बादलों से बरसती है तो कभी-कभी माँ की आँखों से बरस जाती है |
कभी-कभी प्यार भरी नज़रों से बरसती है तो कभी-कभी नफरत की बारूदों से बरसती है |
कभी-कभी इंसानियत की एक आह! से बरसती है तो कभी-कभी धर्म के चौराहों पर बरसती है |
कभी-कभी बुज़ुर्ग के टूटे छातों पर बरसती है तो कभी-कभी युवाओं के अरमानों पर बरसती है |
.........कमाल है न बरसात.....सैकड़ों बूंदों-सी ......अलग-अलग रूपों में बरसती है |

सोमवार, 9 सितंबर 2013

सलाह

                                   सलाह    
         
           मोबाइल की घंटी बजते ही उन्होंने अपना चश्मा नाक़ पर चढ़ा कर पढ़ना चाहा लेकिन अब तो आँखें भी इतनी कमज़ोर हो गईं हैं कि वक्त-बेवक्त साथ ही नहीं देतीं |
        “पता नहीं किसका फ़ोन है....उठा ही लेती हूँ, वर्ना नाम पढ़ने के चक्कर में रही तो फ़ोन कट ही जाएगा |”
        फोन उनकी बहन के बेटे का था | कह रहा था कि, “मौसी जी, आपसे कुछ सलाह करनी है | कुछ उलझन आ गई है और आपकी मदद चाहता हूँ |”
        भांजे से घर चले आने का कहकर उन्होंने फ़ोन काट दिया और सोच में डूब गईं | खुद से ही बतियाने लगीं - कैसी विडंबना है यह...अपने तीस साल के टीचिंग पीरियड में मैंने हजारों बच्चों की काउंसलिंग की....आज भी आस-पड़ोस, मित्र, रिश्तेदार सभी मुझसे सलाह मांगते हैं | लेकिन इसी सलाहने मेरे अपने ही बेटे को मुझसे दूर कर दिया | मैं सभी की उलझनें दूर करती रही और अपने ही रिश्तों की उलझने न सुलझा सकी | मेरा अपना बेटा सिर्फ इसीलिए मेरे पास नहीं रहना चाहता क्योंकि उसे मेरी सलाह..........|”

बुधवार, 4 सितंबर 2013

फेसबुक

                                                                        फेसबुक 
        
         “सुनिए ! बाहर आइये, आपके बचपन के मित्र अशोक जी आए हैं |पत्नी ने ड्राइंग रूम से पति को को आवाज़ लगाई |
         “हाँ ! हाँ ! उसे बैठाओ, मैं अभी कंप्यूटर बंद करके आया |” भीतर वाले कमरे से पतिदेव ने जवाब दिया |
         पत्नी ने आगंतुक को शिष्टाचार पूर्वक बैठाया और उन्हें अकेलापन न महसूस हो, ऐसा सोचकर उन्हीं के सामने बैठ गईं और उनके परिवार इत्यादि के कुशल-क्षेम पूछने लगीं |
         जब काफी देर तक पतिदेव बाहर नहीं आए तो मित्र महोदय उनकी पत्नी से विदा लेकर चले गए |

         भीतर कमरे में जाकर पत्नी ने देखा तो पाया कि 'वे' तो अब तक अपने फेसबुक-मित्रों के साथ चेटिंग में व्यस्त हैं जबकि बचपन का मित्र इंतज़ार करते-करते जा चुका था |