गुरुवार, 12 सितंबर 2013

कमाल है न बरसात

कमाल है न बरसात 

बरसात कहाँ-कहाँ बरसती है...
कभी-कभी गरीब की छत से बरसती है तो कभी-कभी अमीर की तिजोरी में बरसती है |
कभी-कभी बादलों से बरसती है तो कभी-कभी माँ की आँखों से बरस जाती है |
कभी-कभी प्यार भरी नज़रों से बरसती है तो कभी-कभी नफरत की बारूदों से बरसती है |
कभी-कभी इंसानियत की एक आह! से बरसती है तो कभी-कभी धर्म के चौराहों पर बरसती है |
कभी-कभी बुज़ुर्ग के टूटे छातों पर बरसती है तो कभी-कभी युवाओं के अरमानों पर बरसती है |
.........कमाल है न बरसात.....सैकड़ों बूंदों-सी ......अलग-अलग रूपों में बरसती है |

5 टिप्‍पणियां:

  1. Bunde kuch hame sikhati ..har hal main naye geeto ke sur chher jati
    tut ke bhikarti par zivan ke naye raag sunati ..:)

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  2. बरसती है , अपनी कृपा बरसाती है , यह तो हम हैं जो स्थितियों के अनुसार सुख - दुःख की अनुभूति करते हैं. न होने पर भी और अधिक होने पर भी हम परेशान हो जाते हैं. जब कि वर्षा वर्षा ही होती है.

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