बुधवार, 4 सितंबर 2013

फेसबुक

                                                                        फेसबुक 
        
         “सुनिए ! बाहर आइये, आपके बचपन के मित्र अशोक जी आए हैं |पत्नी ने ड्राइंग रूम से पति को को आवाज़ लगाई |
         “हाँ ! हाँ ! उसे बैठाओ, मैं अभी कंप्यूटर बंद करके आया |” भीतर वाले कमरे से पतिदेव ने जवाब दिया |
         पत्नी ने आगंतुक को शिष्टाचार पूर्वक बैठाया और उन्हें अकेलापन न महसूस हो, ऐसा सोचकर उन्हीं के सामने बैठ गईं और उनके परिवार इत्यादि के कुशल-क्षेम पूछने लगीं |
         जब काफी देर तक पतिदेव बाहर नहीं आए तो मित्र महोदय उनकी पत्नी से विदा लेकर चले गए |

         भीतर कमरे में जाकर पत्नी ने देखा तो पाया कि 'वे' तो अब तक अपने फेसबुक-मित्रों के साथ चेटिंग में व्यस्त हैं जबकि बचपन का मित्र इंतज़ार करते-करते जा चुका था |

3 टिप्‍पणियां:

  1. Aaj k tech yug me humhe puri duniya me kya ho raha ha sab pata ha par hamara padosi kis haal me ha ye hame ni pata.to aise high tech yug ka kya fayeda jab apno se apno ka naata hi tut jayee.
    Sunil csi.

    जवाब देंहटाएं
  2. Sach hai... hum diya haath main lekar roshni ko hi khojte hain....

    जवाब देंहटाएं