जीवन पर्यंत कुछ-न-कुछ सीखते रहना चाहिए
जीवन में ‘सीख’ का अंत कभी नहीं होता | ‘सीखने’ का सिलसिला जीवन-पर्यंत चलता रहता है | जिस घडी से सीखना बंद हो जाता है, उसी घड़ी से विकास भी थम जाता है | दरअसल हमारा जीवन एक पुस्तक की तरह है और हर रोज़ सीखे गए अनुभव उस जीवन रूपी पुस्तक के एक-एक अध्याय की तरह है | जीवन में सीखने का कोई अंत नहीं है | हम पूरी ज़िन्दगी सीखते रहें तब भी ज्ञान के स्रोत ख़त्म न होंगें | हमारे जीवन की किताब में बचपन से लेकर अंतिम सांस तक हर रोज़ एक नया पाठ जुड़ता जाता है और चेतना को जगाता जाता है |
यह तब की बात है जब ग्रीक दार्शनिक सुकरात कारावास में थे | सुकरात के लिए यह प्रसिद्ध था कि वे अपने आस-पास के वातावरण और लोगों से कुछ न कुछ सीखते रहते थे | एक बार उन्होंने ध्यान दिया कि उनका एक साथी कैदी बहुत ही कठिन धुन को बड़ी ही सरलता से अपनी मीठी आवाज़ में गा रहा है | वे उसके इस हुनर को अक्सर देखते रहते | एक दिन ऐलान कर दिया गया कि कल सुकरात को फाँसी दे दी जाएगी | अपनी फाँसी की खबर से उन्हें ज़रा भी शिकन न हुई बल्कि वे उस साथी कैदी के गीत को ध्यानपूर्वक सुनते रहे | फिर उसके करीब जाकर बोले – “मुझे भी ये संगीत सिखा दो | तुम कितनी आसानी से इतने कठिन सुर को गा लेते हो ! मैं भी ये सुर सीखना चाहता हूँ |” उस कैदी व्यक्ति ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा – “अब आप क्या करेंगे इस सुर को सीखकर, कल तो आपको सज़ा दे दी जाएगी !” इस पर सुकरात ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया – “....लेकिन मैं फिर भी सीखना चाहता हूँ | मैं चाहता हूँ कि मुझे इस बात की तसल्ली हो कि मैंने अपने जीवन के एक भी दिन को जाया नहीं किया बल्कि अपनी अंतिम साँसों तक अच्छी चीज़ें सीखता रहा |”
सदैव कुछ न कुछ सीखते रहना और अपने व्यक्तित्व को निखारते रहना भी एक आदत की तरह है | हर व्यक्ति इस आदत को नहीं अपना सकता | सच तो यह है कि लोग थोडा-बहुत सीख जाने के बाद अहंकार से इस कदर भर उठते हैं कि अपने से छोटों से कुछ भी सीखने में अपना अपमान समझते हैं | समझदार मनुष्य इस तुच्छ मानसिकता से ऊपर उठ चुके होते हैं | उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ सीखना ही होता है अतः वे हर छोटे-बड़े से ज्ञान लेते चलते हैं | ‘सीखने’ की दिशा में अभिमान सबसे बड़ा रोड़ा है | अभिमानी व्यक्ति अपने अहम् के कारण कुछ भी नहीं सीख पाता और उसके व्यक्तित्व का विकास अवरुद्ध | अतः अपनी लगन को जगाकर निरंतर कुछ न कुछ सीखते रहने वाला व्यक्ति सदैव हीरे के समान दमकता रहता है |
___________________________ रश्मि
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