राजनैतिक पोशाक
एक युवक का सिर फिर गया | वह मुन्ना भाई फिल्म देखकर आया और उसने डिसाइड किया कि अब से वह खादी ही पहनेगा | नया-नया गांधीवादी बना वह युवक खादी के कपड़े खरीदने चल दिया | वह एक ऐसी दुकान पर पहुँचा ....ओह ! माफ़ कीजिए...ऐसे शो-रूम में पहुँचा जहाँ खादी के ही कपड़े बिकते थे | वह एक-एक पोशाक देखता और फिर उसमे लगे रेट-टैग को देखता | बड़ी देर की जद्दोजहद के बाद भी वह युवक अपने लिए कुछ भी नहीं खरीद सका |
क्योंकि...... उसकी जेब में गांधीजी की तस्वीरों वाले इतने ‘हरे पत्ते’ थे ही नहीं कि इस ‘राजनैतिक-पोशाक’ को खरीद पाता |
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