सोमवार, 27 जून 2016

चिरस्थाई सुख

                                     चिरस्थाई सुख 

भ्रम से छुटकारा पाना बेहद आवश्यक है | और यह ज़रा भी मुश्किल नहीं है, आवश्यकता है तो बस मजबूत इच्छाशक्ति की | जिस दिन हमें इस बात का एहसास हो जाता है कि 'यदि ये पूरी की पूरी दुनिया भी मिल जाए तो भी कुछ नहीं मिलेगा', उसी दिन से सभी भ्रम, सभी चाहतें ...सारी ख्वाहिशें खत्म हो जातीं हैं | विचित्र बात यही तो है कि हम सालों साल जद्दोजहद में लगे रहते हैं, कुछ न कुछ पाने के लिए संघर्ष करते रहते हैं | लेकिन हम जो कुछ भी पाने की चाहत करते हैं वे सभी चीज़ें संसारी हैं, भौतिक हैं, नश्वर हैं | सच तो ये है कि ऐसी दुनियावी चीज़ें प्राप्त करना कठिन भी नहीं होता | लेकिन ये जितनी आसानी से मिल जातीं हैं उतनी ही आसानी से छूटतीं भी जातीं हैं | ये वे चीज़ें हैं जो जो हम इस दुनिया में खोजते हैं, पाना चाहते हैं और फिर एक दिन ये इसी दुनिया में कहीं गुम भी हो जातीं हैं | उसी के बाद हमारी चेतना जागती है और हमें एहसास होने लगता है कि ये चीज़ें मेरा लक्ष्य नहीं हैं | ये जिंतनी भी वस्तुएँ दिख रही हैं, मुझे ये नहीं चाहिए ...और तब हमारे भीतर उनकी चाहत खत्म हो जाती है और हम उनकी ओर से आँख मूँद लेते हैं | 

जैसे ही हम बाहरी वस्तुओं की ओर से अपनी आँखें मूँद लेते हैं वैसे ही उनकी इच्छा खत्म हो जाती है | फिर बाहरी आकर्षण छोड़ हम भीतर की ओर देखने लगते हैं और भीतर प्रकाश होना प्रारंभ हो जाता है ...सारा सत्य साफ-साफ नज़र आने लगता है | अब तक स्थूल नेत्र संसार की वस्तुओं को देख रहे थे इसीलिए उनमें ही सुख की तलाश कर रहे थे, उन्हें पाने की मशक्कत में लगे थे लेकिन स्थूल नेत्र ज्यूँ ही बंद हुए सूक्ष्म नेत्र खुल गए | सूक्ष्म नेत्र भीतर की ओर दृष्टि डालते हैं | वे यह देखने की चेष्टा करते हैं कि मैं कौन हूँ ? मेरा अस्तित्व क्या है ? मैं इस संसार में क्या लेने आया हूँ ? मेरी आत्मा को किस वस्तु की तलाश है, उसे किस्में सुख मिलेगा ? ...और इसी के साथ सत्य का बोध प्रारंभ हो जाता है |

हमारे भीतर की आवाज़ इतनी शक्तिशाली होती है कि यदि एक बार जाग जाए तो मनुष्य फिर कभी संसारी आवाजों में नहीं भटकता | हमें अपने भीतर की आवाज़ को ध्यान लगाकर सुनना चाहिए | ये जो भी माँगे, देना चाहिए | यकीन करिए सुख उसी में मिलेगा ...असीम सुख | ये वो सुख होगा जो संसारी वस्तुओं में कभी भी न मिला होगा | ...चिरस्थाई सुख |  
-----------------------------  रश्मि 

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