टूटे घरों से
सब रिस जाता है
हर रिश्ता
रिस जाता है
प्यार रिस जाता है
दरारें आ जाती हैं इतनी
कहाँ कुछ टिक पता है
हर दर्द, हर आह
दरारों को
और भी गहरा बनता है
पहले इन दरारों से
कुछ आवाजें रिसती हैं
फिर दर्द और कराहें रिसती हैं
जब सब चुक जाता है
तब
सन्नाटे रिसते हैं
धीरे-धीरे ये दरारें
बड़ी और बड़ी होती जाती हैं
और आखिर एक दिन
दरारों वाली ये दीवारें
ढह जातीं हैं
वे दीवारें
जो कभी जगमगातीं थीं
उन पर टंगी
अरमानों की लाशें
थोड़ा तड़पतीं हैं
और छटपटातीं हैं
फिर लाचार वे भी
दम तोड़ जाती हैं
_ रश्मि
***********************
सब रिस जाता है
हर रिश्ता
रिस जाता है
प्यार रिस जाता है
दरारें आ जाती हैं इतनी
कहाँ कुछ टिक पता है
हर दर्द, हर आह
दरारों को
और भी गहरा बनता है
पहले इन दरारों से
कुछ आवाजें रिसती हैं
फिर दर्द और कराहें रिसती हैं
जब सब चुक जाता है
तब
सन्नाटे रिसते हैं
धीरे-धीरे ये दरारें
बड़ी और बड़ी होती जाती हैं
और आखिर एक दिन
दरारों वाली ये दीवारें
ढह जातीं हैं
वे दीवारें
जो कभी जगमगातीं थीं
उन पर टंगी
अरमानों की लाशें
थोड़ा तड़पतीं हैं
और छटपटातीं हैं
फिर लाचार वे भी
दम तोड़ जाती हैं
_ रश्मि
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