शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

माँगना नहीं देना सीखो

मनुष्य का स्वभाव भी बड़ा अजीब होता है | वह हमेशा कुछ न कुछ पाने की जद्दोजहद में लगा रहता है | समाज से, राष्ट्र से, रिश्तों से सभी से कुछ न कुछ माँगने की ही चेष्टा में रहता है | सबसे विचित्र बात ये है कि इस माँग का कोई अंत नहीं है |
       
हम हमेशा असंतुष्ट से माँगते ही रहते हैं | हमें इतना अव्यवस्थित, असंतुष्ट किसने बना रखा है ? हमारी माँग ने, इच्छाओं ने, जो कभी ख़त्म नहीं होतीं | हम अपने पूरे जीवन भर सबसे प्यार माँगते हैं और खुद किसी को न प्यार ही दे पाते हैं और न ही विश्वास | हम हमेशा धन की ख्वाहिश करते हैं लेकिन कभी भी अपनी जेब से किसी ज़रूरतमंद पर खर्च नहीं करना चाहते | अपने अंतिम समय तक ईश्वर से भी कुछ-न-कुछ फ़रियाद ही करते रहते हैं लेकिन उसे अपनी निश्छल-भक्ति और श्रद्धा नहीं दे पाते | इसीलिए वॉटर टोंपिल कहते हैं -मनुष्य ही एक ऐसा जीव है जो रोता हुआ पैदा होता है और निराशा में मरता है |”

हमारे बुज़ुर्ग एक कहानी कहते हैं-
      
शुरू-शुरू में ईश्वर ने सभी प्राणियों को बराबर आयु दी थी | सभी को चालीस-चालीस वर्ष आयु मिली | मनुष्य को अपनी उम्र काफी कम लगी और वह लोभ-वश और चाहने लगा| गधे को भी चालीस वर्ष आयु मिली थी लेकिन वह दूसरों का बोझ ढोते-ढोते इतना उकता चुका था कि अपनी आयु घटवाना चाहता था | ईश्वर ने दोनों के मन की बात जान ली और गधे की आयु के बीस वर्ष मनुष्य को दे दिए | इसीलिए हम चालीस वर्ष की उम्र के बाद जिम्मेदारियों के बोझ से दबे होते हैं | घर, परिवार, नौकरी, बच्चे, धन, माँ-प्रतिष्ठा इन्हीं सबको जोड़ने में उलझे रहते हैं | कुछ समय के बाद कुत्ते को भी अपनी चालीस वर्ष की उम्र लम्बी और उबाऊ लगने लगी | पूरे-पूरे दिन भौंकते रहना, इसके अतिरिक्त और कोई काम नहीं | अतः वह भी अपनी फरियाद लेकर ईश्वर के पास पहुँच गया | इधर मनुष्य को अब भी अपनी आयु कम लग रही थी और उसने कुत्ते की उम्र के बीस साल भी स्वीकार कर लिए | इसीलिए साठ वर्ष के बाद मनुष्य को रिटायर समझा जाता है और वह चाहे जितनी भी नसीहत दे, कोई उसकी बात को तवज्जो नहीं देता | आश्चर्य ये कि इतने पर भी मनुष्य की इच्छा का अंत नहीं हुआ, वह अब भी अपने जीवन से असंतुष्ट ही रहा | शायद उसे खुद ही पता नहीं था कि उसे क्या चाहिए| उसे जो भी मिला, वह लेता रहा | आखिरकार उल्लू को भी एहसास हुआ कि उसकी उम्र भी कुछ ज्यादा है | वह दिन-रात औंधा पड़ा करता ही क्या है ? इसीलिए उसने भी ईश्वर से अपनी आयु कम कर देने की विनती की | ईश्वर ने देखा कि मनुष्य का लोभ तो अब भी नहीं मिटा है और उसने उल्लू की आयु भी मनुष्य को ही दे दी | तभी से अस्सी वर्ष के बाद मनुष्य को न नींद आती है, न दिखाई देता है और न ही सुनाई देता है | वह रात-रात भर जागता रहता है |
       
इसीलिए ज्ञानी समझाते हैं कि ईश्वर से लम्बी आयु मत माँगो बल्कि बड़ी आयु माँगो | कभी भी अथाह धन की लालसा मत करो बल्कि कम-से-कम धन के भी सही उपयोग का ज्ञान माँगो | रिश्तों से प्यार मत माँगो बल्कि उन्हें इतना स्नेह दो कि वे सदा-सदा के लिए आपके हो जाएँ | हमारा देश, हमारा समाज सब हमसे ही है और ये समृद्ध हैं तो हमारा अस्तित्व भी है इसीलिए ये मत सोचो कि देश और समाज ने हमें क्या दिया बल्कि खुद उसे देना सीखो | फिर एक दिन ऐसा होगा कि हम देते-देते भी पूरी तरह से तृप्त हो उठेंगे, प्रेम और संतुष्टि से भर उठेंगे | -रश्मि

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