गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

आदिशक्ति माँ

आदिशक्ति माँ
      प्राचीन काल से ही हमारे देश में अनेक देवी-देवताओं के पूजन-अर्चन का विधान चला आ रहा है | हमारे सनातन धर्म में छत्तीस करोड़ देवी-देवता हैं और सभी का विशेष महात्मय है | हम सभी की अराधना बड़े ही भक्ति-भाव और मनोयोग से करते हैं | मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम हों या रसिक शिरोमणि सोलह कलाकारी भगवान् श्रीकृष्ण, आदि शक्ति माँ जगदम्बा हों या हलाहल से सबकी रक्षा करने वाले भोलेबाबा शिवशंकर शम्भुनाथ, या देवों में अग्रगण्य देवाधिदेव गणेश हों, सभी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है | आज के दिन का विशेष महत्त्व है | आज नवरात्रि का नौवां दिन अर्थात् नवमी है | नौ दिन तक चलने वाला नवरात्रि का त्यौहार हम सब बड़ी ही आस्था के साथ मनाते हैं । मूर्ति-स्थापनाकलश-स्थापना, रात्रि-जागरणभजनकीर्तन करके माता रानी को खुश  किया जाता है । हम माँ दुर्गा से सुख, सौभाग्य, ज्ञान, समृद्धिसम्पत्ति, शांति आदि की कामना करते हैं । नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्रीब्रह्मचारिणीचंद्रघंटाकूष्मांडास्कंदमाताकात्यायनीकालरात्रिमहागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है | नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों तक देवी दुर्गा का पूजनदुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक क्रिया-कलाप संपन्न किए जाते हैं |
        यदि हम ध्यानपूर्वक देखें तो हमारी परम्परारीतिरिवाजों और त्योहारों के पीछे एक रहस्य छिपा है जिसे समझना हमारा परम कर्तव्य है । अन्धानुकरण करने से अध्यात्मिक लाभ कतई नहीं मिल सकता | हमारे सभी त्यौहार कोई न कोई सन्देश देते हैं | यदि सम्पूर्ण मानवजाति इन संदेशों को समझ सके और अपने जीवन में आत्मसात कर ले तो जीवन सुन्दरतम हो बन जाए और श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो | हमारे नौ दिन के व्रत हमें भूखे रहने का सन्देश नहीं देते बल्कि संयम और त्याग की शिक्षा देते हैं | मानव का अधिकांश जीवन क्षुदा-पूर्ति में ही निकल जाता है | फिर चाहे वो पेट की हो या मन की, आत्मा की हो या शरीर की, भौतिक हो या बौद्धिक | यदि हम अपनी पेट की क्षुदा पर नियंत्रण नहीं रख सकते तो मानसिक और वैचारिक क्षुदा को कदापि पूरा नहीं कर सकते | अपनी सकारात्मक परिस्थितियों को नहीं साध सकते तो नकारात्मक पलों पर संयम और धैर्य कदापि नहीं रख सकते | इन नौ दिनों में माँ के कीर्तन का भी विशेष महात्मय है | यह हमें वाणी पर नियंत्रण करने की सीख देता है | कीर्तन हमें सिखाता है कि अनर्गल प्रलाप और वक्त की बर्बादी से कहीं ज्यादा बेहतर है कि हम अपने समय को ईश्वर से जोड़ दें और उस आदिशक्ति से अपार शक्ति और प्रेरणा ग्रहण करें | व्रत-उपवास के समय कम से कम बोलना चाहिए | अपने चित्त को एकाग्र कर माँ के रूप-ध्यान में जोड़कर रखना चाहिए | कदाचित् इसीलिए मौन का महत्त्व है | व्यक्ति जितना मौन रहेगा उतना ही ‘सर्व’ से ‘स्व’ में उतरेगा | माँ अपने अपने नौ रूपों में हम सभी के भीतर विद्यमान हैं | यदि हम ‘स्व’ के भीतर उतरें और आँख मूंदकर कुछ वक्त अपने भीतर झाँकें तो पाएँगे कि माँ की सभी शक्तियाँ अपने सूक्ष्मतम रूप में हमारे भीतर भी ऊर्जा का संचार कर रहीं हैं | माँ हमें अपनी ज्ञान की शक्ति से बुद्धिमान बनातीं हैं | वे हमें धैर्य और संयम रखना सिखातीं हैं | श्री प्रदान कर हमारे जीवन को सुख और वैभव देती हैं | निरोग और सौन्दर्य की दात्री भी माँ हैं |
        जिस प्रकार हम बड़े पैमाने में माँ के इन नौ रूपों और उनकी शक्तियों को देखते हैं उसी प्रकार यदि किसी स्त्री के भीतर देखें तो पाएंगे कि माँ के ये सभी अंश किसी न किसी खास गुण के रूप में उसके भीतर भी विद्यमान हैं | आज के आधुनिक युग में एक स्त्री माँ, बहन, बेटी, पत्नी आदि अनेक रूपों में अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर रही है | हर स्त्री के भीतर माँ की यही अपार शक्ति मौज़ूद है जो उसे अपने कर्तव्य-पथ पर अग्रसर कर रही है | यदि हम वृहद् दृष्टि से देखें तो स्त्रियाँ सदैव से ही अनेकानेक गुणों की खान रहीं हैं और ये सभी गुण उस माँ की ही कृपा से हैं | कदाचित् इसीलिए जन्मदात्री माँ और देवी माँ, दोनों को ही एक ही संबोधन ‘माँ’ कहकर पुकारा जाता है |
         नवमी के इस शुभ दिन में हम सभी भक्तों को माताजी की भक्ति के साथ-साथ अपने कर्तव्य का भी अहम् पाठ सीखना होगा | ‘संस्कार’ हर भारतवासियों के रगों में है और हम सभी देवी माँ पर अटूट आस्था और विश्वास रखते हैं फिर क्या कारण है कि दिन प्रतिदिन स्त्रियों के प्रति अपराध और दुराचार जोर पकड़ते जा रहे हैं | कन्या, बेटी, बहन, बहू या माँ के  रूप में देवियाँ ही अवतरित हैं | फिर क्यों ये सब भुलाकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है ! हम कन्याओं को पूजते भी हैं और उन्हीं के साथ पशुवत व्यवहार भी करते हैं | संस्कारवान होने के नाते, मातृभक्त होने के नाते, अपने परिवार और समाज के प्रति प्रेमभाव रखने के नाते हम सभी का कर्तव्य है कि हम हर उस स्त्री को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करें जो किसी न किसी रूप में हमसे जुड़ी हुई है | साथ ही साथ यदि किसी महिला के प्रति कोई पाशविक कृत्य होता देखें तो डटकर विरोध करें | माँ के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा और सच्ची भक्ति तभी प्रकट होगी जब हम सभी महिलाओं के भीतर उसका अंश देखेंगे और उन्हें सम्मान व सुरक्षा प्रदान करेंगे | रश्मि

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