व्यक्ति किसी भी आयु-वर्ग का क्यों न हो, अगर वह
अपने मन, वचन और कर्म पर संयम रख सकता है तो हर परिस्थिति का
सामना कर सकता है | अक्सर व्यक्ति उत्तेजना के कारण अपने
व्यवहार और अपनी स्थिति को और भी बद्तर बना देता है | मनुष्य
के लिए संयम परम आवश्यक है | विपरीत परिस्थितियों में ‘संयम’ लगाम का कार्य करता है | यदि अपने व्यवहार को संयमित कर लिया जाए तो ‘अहं’
पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है |
एक बार की बात है मुहम्मद साहब और उनके दामाद हजरत अली
साथ-साथ चले जा रहे थे| रास्ते में एक व्यक्ति मिला उसकी हजरत अली
से पुरानी दुश्मनी चल थी | उसने हजरत अली को देखते ही अपशब्द
बोलने शुरू कर दिए | पहले तो हजरत अली उन्हें अनसुना करने की
कोशिश करता रहा किन्तु शीघ्र ही उसके संयम ने जवाब दे दिया| अब
हजरत अली ने भी उस व्यक्ति को अपशब्द बोलने शुरू कर दिए | उनके
अपशब्द और झगड़े को सुन मुहम्मद साहब आगे बढ़ गए | हजरत अली ने
जब देखा कि वे तो चले जा रहे हैं तो झगड़ा बीच में ही छोड़ उनके पास आ गया | उसने पास आकर पूछा- “आप मुझे उस दुष्ट के पास अकेला
छोड़कर क्यों चले आए ?” मुहम्मद साहब ने हँसते हुए कहा- “अली ! जब तुम उस व्यक्ति के अपशब्दों का उत्तर नहीं दे रहे थे तब तुम्हारी
सभी इंद्रियाँ तुम्हारा साथ दे रहीं थीं, लेकिन जैसे ही
तुमने अपनी जुबान पर से अपना संयम खोया वैसे ही तुम्हारी इन्द्रियों ने भी
तुम्हारा साथ छोड़ दिया | जब तुम्हारा विवेक ही तुम्हारा साथ
नहीं दे रहा था तो मैं तुम्हारा साथ कैसे दे सकता था ?”
आशय यह है कि यदि कोई कड़वे वचन बोले तो उसे अनसुना कर देना
चाहिए | उसके वचन हमें तभी प्रभावित करेंगे जब हम खुद को प्रभावित होने देंगे |
यदि हम अपना संयम कायम रखें तो अंततः वह खुद ही चुप हो जाएगा |
कटु वचन बोलने वाले का मकसद ही हमें ठेस पहुँचाना और झगड़े के लिए उकसाना
होता है | ऐसे में ‘संयम’ ही एकमात्र ऐसा उपाय है जो कवच का काम करता है | संयमी
व्यक्ति में धैर्य और आत्म-नियंत्रण की ताकत होती है और इसी वजह से वह वाद-प्रतिवाद
करने में रूचि नहीं लेता|
वाद-विवाद मनुष्य के जीवन का महत्त्वपूर्ण समय व्यर्थ ही
बर्बाद कर देता है | अनेक लोगों को बिना किसी कारण के या बेहद ही मामूली सी वजह पर
विवाद करते और झड़प करते देखा जा सकता है जबकि यदि उनसे उस झड़प का ओचित्य पूछा जाए
तो वह निर्मूल ही होगा | मेरा मानना है कि यदि अपनी क्षमताओं का सही मूल्यांकन
किया जाए और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा दिया जाए तो हर लक्ष्य को हासिल करना
आसान हो जाता है | व्यर्थ का वाद-विवाद जीवन में रुकावटें
पैदा करता है | ऐसी परिस्थितियों में संयम ही एकमात्र उपाय
है | संयमी व्यक्ति बड़ी से बड़ी विपरीत परिस्थितियों में भी
विचलित नहीं होता | खुद पर संयम रखकर वह खुद को तो वहाँ से निकालता ही है साथ ही
साथ उस विवाद को और आगे नहीं बढ़ने देता | इससे एक महत्त्वपूर्ण काम यह भी होता है
कि उस विवाद की आग को घी नहीं मिलता और वह वहीँ पर ही समाप्त हो जाता है | -
रश्मि
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