गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

सजगता का होना अति आवश्यक

सजगता का होना अति आवश्यक
         
इंसान में सजगता का होना अति आवश्यक है | सजगता माने सदैव अलर्ट रहना | जब तक मनुष्य के भीतर सतर्कता नहीं जागती तब तक उसके जीवन के कोई मायने नहीं है | सतर्क व्यक्ति हर लक्ष्य प्राप्त कर सकता है और ईश्वर तक के करीब पहुँच सकता है | अपने टारगेट्स को लेकर चौकन्ना या सतर्क रहने वाला व्यक्ति पूरी चैतन्यता के साथ उससे जुड़ जाता है | उसकी समस्त मानसिक शक्ति और शारीरिक ऊर्जा अपने लक्ष्य को पाने में लग जाती है जबकि जो लोग लापरवाह या आरामतलब होते हैं, वे हर परिस्थिति को बड़े ही सहज तरीके से ले लेते हैं | नतीजा ये होता है कि लक्ष्य-प्राप्ति की ओर उनकी रफ़्तार में बाधा पहुँचती है | इस बात को और बेहतर तरीके से समझाने के लिए एक रोचक जानकारी साझा करना चाहूँगी तलवारबाजी के लिए बेहद सतर्कता की आवश्यकता होती है | जो इंसान बेहद चौकन्ना होता है वही इस विद्या को सीख सकता है | जापान के कई स्कूलों में तलवारबाज़ी सिखाई जाती है और उन स्कूलों के बोर्ड में लिखा होता है – ‘हाउस ऑफ़ गॉड’ | इस सन्दर्भ में ओशो एक रोचक कहानी कहते हैं- एक बार एक शिष्य तलवार सीखने के उद्देश्य से गुरु के आश्रम में पहुंचा | गुरु ने पूछा- क्या तुम लम्बे समय तक यहाँ रह सकते हो क्योंकि तलवार चलाना सीखने में कई वर्ष भी लग सकते हैं | कुछ लोग तो इस कला को कुछ ही समय में सीख जाते हैं और कुछ लोग जीवन भर नहीं सीख पाते | इसके लिए बेहद सजगता की आवश्कता होती है |” शिष्य ने रुकने की हामी भर दी | जब उस शिष्य को आश्रम में रहते हुए करीब साल भर बीत गया तो उसने गुरु जी से कहा- कृपया अब मुझे भी यह विद्या सिखाइए |” गुरु ने कहा- नहीं ! अभी तुम आश्रम की सेवा, साफ़-सफाई आदि का काम करो | सही वक्त आने पर सिखाउंगा |” ये सब काम करते हुए उसे फिर साल भर हो गए और उसने फिर प्रार्थना की | एक दिन की बात है वो किसी काम ने तल्लीन था, और गुरु ने पीछे से लकड़ी की तलवार से वार कर दिया | वह चौंक पड़ा | अब ऐसा नियमित होने लगा | वह किसी काम में डूबा होता, सो रहा होता, भोजन कर रहा होता और गुरु अचानक से वार कर देते | वह घबरा उठा | अब वह सदैव ही सतर्क रहने लगा | उसकी उठने, बैठने, लेटने आदि की मुद्राएँ भी उसकी सतर्कता का परिचय देने लगीं | अब गुरु जैसे ही वार करते, वह चौकन्ना हो जाता और हाथ से बचाव कर लेता | उसने भी गुरु से तलवार माँगी और सिखाने की विनती की लेकिन गुरु ने इस बार भी इंकार कर दिया | एक रात वह उठा और उसने नींद में डूबे गुरु के ऊपर तलवार तान दी | वह वार करने ही वाला था कि गुरु ने अपनी आँखें खोले बिना ही उसे रुकने का आदेश दिया | वह हैरान रह गया | उसने पूछा – “आपकी आँखें तो बंद थीं फिर आपको मेरे वार करने का पता कैसे चला !गुरु ने समझाया – “यह सतर्कता की वह स्थिति है जब दूसरों की पदचाप, मन की गति और विचारों की आवाज़ भी सुनाई देने लगती है | जिस दिन तुमने ऐसी स्थिति प्राप्त कर ली समझो तलवारबाजी का असली ज्ञान प्राप्त कर लिया |”
इसी प्रकार की चैतन्यता से अपने लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है | और तो और ईश्वर को प्राप्त करने में भी यही चैतन्यता आवश्यक होती है | जब मनुष्य सोते-जागते, उठते-बैठते प्रत्येक कार्य करते अपने लक्ष्य से जुड़ा रहता है और उसकी समस्त चेतना उसी में लगी रहती है तभी उसे सफलता की प्राप्ति हो पाती है | -रश्मि 


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