मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

लगातार किया जाने वाला प्रयास परिणाम अवश्य देता है

लगातार किया जाने वाला प्रयास परिणाम अवश्य देता है

       अपनी दिशा में निरंतर बढ़ते रहना चाहिए | अपने प्रयासों को कभी भी कम या निरर्थक नहीं समझना चाहिए क्योंकि लगातार किया जाने वाला प्रयास परिणाम अवश्य देता है | आवश्यकता है तो बस परिश्रम और विश्वास की |
एक किस्सा है
       एक चिड़िया थी | उसने आराम से रहने के लिए एक शानदार घोंसला बनाने का विचार किया | उसने सोचा कि वह इसमें अपने अण्डों को सहेज सकेगी | फिर बाद में वह और उसके बच्चे उस घोंसले में सुख से रहेंगे | उसने इधर-उधर देखा उसे एक पेड़ नजर आया और फिर उसने उसकी डाल पर घोंसला बनाना शुरू कर दिया |
      तभी वहां एक गिलहरी आई और बोली - अरे चिड़िया ! ये क्या कर रही हो, यहाँ तो माली तुम्हारा घोंसला तोड़ देगा |”
      चिड़िया को उसकी बात सही लगी और वह अपना घोंसला अधूरा बना छोड़ वहां से चली गई | अब उसने एक घर के छज्जे पर घोंसला बनाना शुरू कर दिया | कुछ देर बाद आधा घोंसला बनकर तैयार हो गया | यह देखकर वह चिड़िया काफी खुश हुई कि तभी अचानक उसकी नजर घर की दीवार पर बैठी बिल्ली पर पड़ी | बिल्ली उसे देखकर हँस रही थी |
      चिड़िया गुस्से से बोली - “हँस क्यों रही हो ?”
     “हँसू नहीं तो और क्या करूँ !  इस घर का मालिक एक ही बार में तुम्हारे घोंसले को उठाकर फेंक देगा |”
      ये बात भी चिड़िया के दिमाग में बैठ गई | उसने अच्छी सलाह के लिये बिल्ली को धन्यवाद दिया और आधे बने घोंसले को छोड़कर दूसरी जगह तलाश करने लगी | उसने एक बगीचे में खड़ी पत्थर की विशाल मानव मूर्ति के अंगों के बीच में सुरक्षित जगह खोजकर घोंसला बनाना शुरू कर दिया | वह कुछ देर तक घोंसला बनाती रही |
        तभी एक बन्दर आया और चिड़िया का मजाक उड़ाते हुए बोला- “अरे चिड़िया ! तू भी कितनी बेवकूफ है |”
      “क्यों ?” चिड़िया ने गुस्से से पूछा |
      बन्दर उसे समझाने लगा- “अरे ! यहां तो बड़ी तेज हवा चलती है | यहाँ तो तू अपने घोंसले के साथ ही उड़ जायेगी |”
      चिड़िया को बन्दर दादा की बात ठीक लगी और वह वहाँ भी घोंसला अधूरा बना छोड़कर सोचने लगी कि अब कहाँ अपना घोंसला बनाया जाए ! समय काफी बीत चुका था और उसे भूख भी लगने लगी थी | बार-बार प्रयास करने के कारण वह काफी थक भी चुकी थी और अब उसके अन्दर घोंसला बनाने की ताक़त भी नहीं बची थी |
      एक बूढ़ा कबूतर बहुत देर से चिड़िया को देख रहा था | उसने पास आकर परेशान चिड़िया को समझाया - तुम बार-बार अपना काम शुरू करती हो और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती हो | जो लोग अपनी बुद्धि न लगाकर दूसरों के कहने पर अपना काम बीच में ही अधूरा छोड़ देते हैंउनका यही हाल होता है |” ऐसा कहकर वह उड़ गया | अब तक चिड़िया को भी अपनी गलती का एहसास हो चुका था |

          हमारी ज़िन्दगी मे भी कई बार ऐसा ही होता है| हम जोश में आकर कोई काम शुरू तो करते हैं|
 किन्तु दूसरों की बातों में आकर उसे बीच में ही छोड़ भी देते हैं | शुरू-शुरू में तो हम उस काम के लिए खूब उत्साहित रहते हैं लेकिन फिर धीरे-धीरे लोगों की सलाहों की वजह से हमारा उत्साह कम होने लगता है और हम अपना काम बीच मे ही छोड़ देते हैं | बाद में जब हमें पता चलता है कि हम अपनी सफलता के कितने नज़दीक थे तो फिर पछतावे के अलावा कुछ शेष नहीं बचता | इसीलिए हमें लगातार काम करते रहना चाहिए और विश्वास रखना चाहिए कि एक दिन सफलता ज़रूर मिलेगी |
-रश्मि 


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