सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

मनुष्य-जीवन : एक यात्रा के समान

मनुष्य-जीवन : एक यात्रा के समान
         
        मनुष्य-जीवन एक यात्रा के समान है | हम सब यहाँ अपने-अपने हिस्से का सफर तय करते हैं | हर व्यक्ति के जीवन का ख़ास मकसद है | हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम इस धरती पर किसी ख़ास कार्य को करने के लिए ही आए हैं | यही कारण है कि हमारे जीवन का सफ़र निरंतर चलता रहता है | यदि हम रुक भी जाएँतो भी जीवन कभी नहीं रुकताकभी नहीं थमता | जो लोग निरंतर अपने कर्तव्य-पथ पर चलते रहते हैं और अपनी मंजिल पर निगाह गड़ाए रहते हैं वे ही इतिहास रच पाते हैं | जबकि वे लोग जो हमेशा हताश और निराश रहते हैं और अपने जीवन को बे-मक़सद आगे की ओर धकेले चले जाते हैंवे किसी भी मंजिल पर नहीं पहुँच पाते और एक दिन बिना कोई योगदान दिए इस संसार से भी विदा हो जाते हैं |
        जीवन-यात्रा कभी भी निरर्थक नहीं होनी चाहिएउसका कोई न कोई प्रयोजन ज़रूर होना चाहिए | ये नहीं कि कटी पतंग के समान किसी भी ओर उड़ चले | जिस प्रकार धरती की ओर गिरती हुई कटी पतंग का कोई निश्चित ठिकाना नहीं होता उसी प्रकार बे-मकसद और अनजाना सफ़र तय करने वाला इंसान किसी मंजिल तक नहीं पहुँच पाता | अक्सर ये भी होता है कि कुछ लोगों को अपनी मंजिल तो पता होती है लेकिन सफ़र का सही-सही ज्ञान नहीं होता | वे तय ही नहीं कर पाते कि किस राह का चुनाव करना है |
        एक बार एक लड़का अपनी राह चला आ रहा था | उसे अपनी मंजिल पता थी | .....लेकिन अचानक वह एक ऐसे चौराहे पर पहुँच गया जहाँ से आगे किस दिशा की ओर बढ़ा जाए ये तय करना उसके लिए मुश्किल हो रहा था | वह नहीं समझ पा रहा था कि उसे किस ओर जाकर अपनी मंजिल मिलेगी | सफ़र लम्बा भी था अतः सोच समझकर ही कोई निर्णय लेना था | उसने चौराहे पर लगे दिशा-सूचक संकेत को खोजा लेकिन वह भी उखड़ा पड़ा था | लड़का अब तक काफी भ्रमित हो चुका था |
       लगभग ऐसी ही स्थिति आजकल के युवाओं की भी हो रही है वे चुस्त हैंबुद्धिमान हैंसक्षम हैं किन्तु कभी-कभी जीवन-राह में आने वाले चौराहों पर भ्रमित हो जाते हैं कि आगे कौन-सी राह पकड़ी जाए !! इसका एक बेहद आसान उपाय है - वह लड़का उस चौराहे तक किसी एक राह से तो चलकर आया ही है न ऐसे में यदि वह उस दिशा-सूचक की एक दिशा-संकेत को भी सही दिशा की ओर लगा दे (जिस दिशा से चलकर वो आया है) तो बाकी की तीन दिशाएँ स्वत: ही स्पष्ट हो जाएंगीं और वह निर्णय भी कर पाएगा कि उसे किस ओर जाना है वह अपनी मंजिल तक बिना भटके और बिना अतिरिक्त समय गँवाए पहुँच सकेगा |                     इसी प्रकार हर व्यक्ति किसी न किसी राह पर चल ही रहा होता है | व्यक्ति अपने विगत जीवन में जिस राह से चलकर आ रहा होता हैवही राह उसके आगे के रास्ते को भी तय करती है इसीलिए भविष्य की कामयाबी के लिए बचपन से ही सही राह पर ही सफ़र प्रारम्भ करना चाहिए रास्ते में आने वाला एक छोटा-सा बैरियर या छोटा-सा भटकाव भी असफलता का कारण बन सकता है |  
-------------------------------------------------------------------रश्मि 

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